Poetry


गिला – Gila Poetry

ज़िन्दगी सर्द एक ख़ला है मुझे; टूटे ख़्वाबों का क़ाफिला है मुझे. तेरे होने से मुझे सुकूं कब था; तेरे जाने का पर गिला है मुझे. करूं भी तो करूं शिक़ायत क्या; राहतों का भी तू सिलसिला है मुझे. पहन रक्खा है जिस्मानी हमनें पैराहन; वस्ल के रोज़, ये भी तो फ़ासला है मुझे. कभी नफ़रत में भी लज़्ज़त तलाश लेता था; अब तो उल्फ़त...

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कभी कभी – Kabhie Kabhie Poetry

धूप के साए में शब्-ए-इंतज़ार गुज़री; दिन के अंधेरों नें डराया कभी कभी. वैसे तो ज़िन्दगी ख़ुशगवार ही रही; बेजान कहकहों नें सताया कभी कभी छोटी छोटी बातों में खुशियाँ बड़ी बड़ी; ढूंढता रहा, ढूंढ पाया कभी कभी. बड़े लोगों की बातों में आया बड़ा मज़ा; वज़न मगर बात में आया कभी कभी. उसका कभी जो ज़िक्र चला अश्क़ बह चले; रूबरू हुए तो हंसाया...

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वजूद – Wajood Poetry

मैंने तेरे वजूद को कुछ नाम ना दिया; कुछ नें तुझे ख़ुर्शीद कहा, कुछ नें माहताब। पढ़ना ना आया ख़ल्क़ को एक लफ्ज़ भी कभी; कहने को मेरी ज़िन्दगी है इक खुली क़िताब। जज़्बात में बहकर भी कभी कुछ तो बोलिये; आवाज़ में जुम्बिश तो हो, रुख़ पे हो गर नक़ाब। दौर-ए-इंतज़ार कि लज़्ज़त ना पूछिए; अपनी सी लगी हमको हर ख़ातून बाहिजाब। Originally published...

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मक़ाम – Maqaam Poetry

जाने क्यूँ हर मुक़ाम पर बस तू ही मिल गया; ये ज़िन्दगी तुझसे कभी आगे नहीं गयी. वो जानता था बात बिगड़ जायेगी लेकिन; उससे जुबां अपनी संभाली नहीं गयी. सीने पे मेरे ज़ख्मों के दाग़ हैं बहुत; नज़र मगर उससे झुकाई नहीं गयी. दामन में मेरे कांटे हैं बस, और कुछ नहीं; मुख़्तसर सी बात ये समझाई नहीं गयी. बारहा किया था मैंने ज़िक्र-ए-ज़ख्म-ए-दिल;...

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झरोखा – Jharokha Poetry

दर्द का बयाबां है, ख़ुशी की एक गली भी है; कह्कहों के तूफ़ान में, अश्कों की नमी भी है; मुद्दतों के फासलों में, यादों के झरोखे से; सालती है मुझको जो, वो आपकी कमी सी है. मुन्तज़िर क्यों रात है, क्यों चाँद आश्ना सा है; धडकनों का शोर क्यूँ, और सांस क्यों थमी सी है. सहमी सहमी ज़िन्दगी पे मौत का ये सर्द खौफ़; हर...

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